सबसे शुद्ध खाना क्या है?HealthPlanet

Posted on Fri 23rd Dec 2022 : 13:43

धरती पर खाने की सबसे शुद्ध चीज़


घी

तली हुई कतला मछली के साथ घी चावल हो या फायाना भात जिसे चावल को उसके मांड़ के साथ पकाया जाता है और साथ में उबले आलू का भर्ता और उबले अंडे... या फिर हो खिचड़ी.... अपने कई बंगाली व्यंजनों में घी का तड़का लगाने वाले फ़ूड राइटर कल्याण कर्मकार कहते हैं कि उनके ये खाने घी के बिना अधूरे हैं.

हालांकि हमेशा ऐसा नहीं था.

हज़ारों वर्षों से घी इस उपमहाद्वीप के भोजन का एक अहम आहार रहा है लेकिन कुछ दशकों पहले यह थाली से बाहर होने लगा जब बड़े स्तर पर यह माना जाने लगा कि सैचुरेटेड फैट यानी संतृप्त वसा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. लेकिन हाल ही में, जैसे जैसे पूरी दुनिया में सैचुरेटेड फैट को लेकर सोच बदली है भारतीयों की थाली में भी इसकी अपने पुराने दिनों के अनुरूप ही वापसी हो रही है.

कर्मकार की घी में लौटी रुचि भारत में चल रहे अपनी 'बुनियाद की ओर वापसी' के उस आंदोलन का हिस्सा है जिसे वर्षों से बनाने की कोशिश चल रही थी लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इसने तब ज़ोर पकड़ा जब लोग अपने खान पान को लेकर ज़्यादा सक्रिय और जागरूक होने लगे.
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गिर की गाय


गाय का घी

भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात के सूरत में एक डेयरी फर्म, घी उत्पादक और गिरऑर्गेनिक के सह-संस्थापक नितिन अहीर अधिक मात्रा में दूध देने वाली गायों की नस्लों जैसे जर्सी, होल्स्टीन और फिरिजियन की जगह गिर गायों के दूध का इस्तेमाल करते हैं. ये गायें काठियावाड़ प्रायद्वीप के गिर की पहाड़ियों और जंगलों में मूल नस्लें हैं.

वे अपनी गायों को खुले में चारा चरने देते हैं, साथ ही ये भी सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक गाय को दुहने से पहले उनके बछड़ों को सही अनुपात में उनका पहला हिस्सा मिले.

उनका ए2 घी अपने पोषण में बढ़िया माना जाता है जिसे बिलोना प्रक्रिया के तहत बनाया जाता है. अब घी निकालने की इस प्रक्रिया में दही मथने के लिए मोटर से जुड़ी मथनी का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे कम कीमत में बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाता है. हालांकि नितिन का कहना है कि कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से उनके घी की मांग में 25 से 30 फ़ीसद की वृद्धि हुई है.

मूल रूप से घी वो मक्खन है जो भारत जैसे गर्म जलवायु वाली जगह पर उसे (मक्खन को) ख़राब होने से बचाने के लिए इजाद किया गया रूप है. मथी गई क्रीम या मक्खन को धीमी आंच पर तब तक उबाला जाता है जब तक कि उससे हर तरह के ठोस पदार्थ निकल न जाएं. अंत में बहुमूल्य, सुगंधित, मेवे के स्वाद जैसी वसा बच जाती है. यही घी है.

हालांकि, भारतीय के लिए सीधे तौर पर वसा या फैट खाने की जगह घी का सेवन कहीं अधिक बेहतर माना जाता है. यह आस्था से भी जुड़ा है.

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पूजा में घी

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